देहरादून: सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने आज देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित जसवंत ग्राउंड में रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित पूर्व सैनिक (ईएसएम) रोजगार मेले का रिबन काटकर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेले में लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन भी किया। रोजगार मेले में 40 से अधिक निजी कंपनियों ने भाग लेकर पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के विविध अवसर उपलब्ध कराए।
इस अवसर पर सैनिक मंत्री गणेश जोशी ने भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग एवं महानिदेशालय पुनर्वास की इस सार्थक पहल में सहयोग देने के लिए कॉर्पोरेट जगत का आभार व्यक्त किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि चारों ओर उपस्थित वे जांबाज सैनिक हैं, जिन्होंने अपने जीवन का स्वर्णिम काल मातृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी वीरता और त्याग की तुलना किसी से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह रोजगार मेला उन पूर्व सैनिकों के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव को सहज बनाने का प्रयास है, जब वे वर्दी छोड़ने के बाद अपने और अपने परिवार के पालन-पोषण हेतु नागरिक जीवन में नए अवसर तलाशते हैं। उन्होंने कहा कि अपेक्षाकृत कम आयु में सेवानिवृत्त होने वाले पूर्व सैनिकों को दूसरा करियर विकल्प उपलब्ध कराना इस मेले का मुख्य उद्देश्य है।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और स्वरोजगार के संकल्प से भी प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्दीधारी जीवन से नागरिक समाज तक की यात्रा चुनौतीपूर्ण होती है, और इस परिवर्तन में पूर्व सैनिकों का सहयोग करना केवल सरकार ही नहीं बल्कि समाज एवं कॉर्पोरेट जगत की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार उपनल के माध्यम से राज्य के पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और युवाओं को शीघ्र ही विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। सैनिक कल्याण मंत्री जोशी ने रोजगार मेले में सक्रिय भागीदारी के लिए कॉर्पोरेट जगत का विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि पूर्व सैनिकों के योगदान को न केवल याद रखा गया है, बल्कि उसका सम्मान और उपयोग भी सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
सैनिक कल्याण मंत्री ने कहा कि आज स्वरोजगार के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक नौकरी लेने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें, और स्वरोजगार के क्षेत्र में सक्रिय हों। मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि सितारगंज में एक पूर्व सैनिक ने स्टार्टअप शुरू कर दस लोगों को रोजगार दिया, जिसका कारोबार दो करोड़ रुपए का है। आतिथ्य, पर्यटन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विशेष रूप से चारधाम यात्रा, डेस्टिनेशन वेडिंग, सेब उत्पादन व मिलेटस से जुड़े अवसरों का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि सरकार तकनीकी उपकरण, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता के माध्यम से पूर्व सैनिकों को सक्षम बना रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं और समाज एवं राज्य में योगदान दे सकते हैं।
इस अवसर पर महानिदेशक पुनर्वास मेजर जनरल एसबीके सिंह, एनसीसी निदेशालय उत्तराखंड से मेजर जनरल समीर भल्ला, निदेशक सीआईआई उत्तराखंड गौरव लांबा, ब्रिगेडियर सुधीर मलिक, एडीजी (पश्चिम) सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।
